होली – Essay On Holi In Hindi

होली – Essay On Holi In Hindi – आज के वैज्ञानिक युग में मानव चांद पर पदार्पण कर चुका है। इसमें संदेह नहीं कि यह बीसवीं शताब्दी के मानव की एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। अंतरिक्ष स्टेशन बनने की योजना को भी सम्भव बनाया जा रहा है। निश्चय ही यह मानव के मस्तिष्क के विकास की चरम सीमा है।

लेकिन मानव के समुचित विकास के लिए मस्तिष्क के साथ हृदय के विकास की भी आवश्यकता है। हमारे त्योहार एवं पर्व हृदय के के विकास में विशेष सहायक हैं। उत्सव हमारे मन में सरलता, करुणा, अतिथि-सेवा एवं परोपकार की भावनाएं उत्पन्न करते हैं।

यही कारण है कि भारत जैसा देश त्योहारों को अधिक महत्व देता है। त्योहार जीवन और जाति का प्राण हैं। प्रत्येक ऋतु कोई ना कोई त्योहार अपने साथ अवश्य ले कर आती है। त्योहारों से जीवन की नीरसता दूर होती है तथा भारतीय धर्म, संस्कृति एवं महापुरुषों के प्रति आस्था बढ़ती है।

बच्चों के जीवन में तो त्योहार उल्लास की सरिता बहा देते हैं। बच्चों में भारतीयता उत्पन्न करने का सर्वश्रेष्ठ साधन ये पर्व और त्योहार हैं।

होलीEssay On Holi In Hindi

होली – होली भारत का प्रसिद्ध पर्व है। यह सारे भारत में बड़े हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है। फाल्गुन की पूर्णिमा के दिन विशेष चहल-पहल होती है। लोग बड़े चाव से अपने मित्रों पर रंग डालते हैं और मुख पर गुलाल मलते हैं।

ऋतु से संबंध – इस पर्व का संबंध ऋतु के साथ भी है। बसंत ऋतु का आगमन होता है, चारों ओर बसंत ऋतु अपनी अनूठी सुंदरता बिखेरती है। प्रकृति अनुपम सौंदर्य लेकर अपना श्रृंगार करती है। चारों ओर मस्ती का साम्राज्य होता है। लोग अपना हर्ष और उल्लास प्रकट करने के लिए मित्रों पर गुलाल छिड़कते हैं और मलते हैं। बच्चे और जवान पिचकारियां लेकर मुहल्ले-मुहल्ले में घुमते हैं और मित्रों एवं सम्बन्धियों पर रंग डालते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि – हिरण्यकश्यपु राजा बड़ा नास्तिक और घमंडी था। उसने अपने पुत्र प्रह्लाद को राम नाम के जप से रोकने का प्रयत्न किया। जब सभी उपाय निष्फल हो गए तो उसने अपनी बहन होलिका को यह काम सौंपा कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर जला दे। होलिका बच जाएगी, क्योंकि उस पर आग का कोई प्रभाव नहीं होगा और प्रह्लाद जल जाएगा। इस प्रकार पिता कि आज्ञा भंग करने का उसे दण्ड मिलेगा। होलिका ने ऐसा ही किया। ईश्वर की इच्छा से होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया। उस दिन को स्मरण करके यह उत्सव प्रति वर्ष मनाया जाता है।

Essay On Holi In Hindi

पर्व को मनाने का ढंग – इस दिन चारों ओर ‘होली आई, होली आई’ की आवाज़ से आकाश गूंज उठता है। उत्तर प्रदेश में ढोलक और मंजीर के साथ खूब राग-रंग होता है। अनेक स्थानों पर रात को नाटक और सवांग का प्रबंध भी किया जाता है।

दोष – आज कल बहुत से लोग इस दिन शराब पीते और दंगा-फसाद करते हैं। कई नौजवान आती-जाती लड़कियों पर रंग डालते हैं और अश्लील हरकतें करते हैं। कई जगह रंग डालने के कारण दंगे हो जाते हैं। इस पवित्र त्योहार को भली-भांती मनाना चाहिए। शराब पीना और दंगा-फसाद करना बुरा है। सरकार को चाहिए कि वह इस पवित्र त्योहार की मान-मर्यादा को बनाए रखे कि जो होली की आड़ लेकर लड़कियों को छेड़ते हैं तथा मदिरापान करके दंगे-फसाद करते हैं।

होली एक पवित्र पर्व एवं सत्य का चिन्ह है। हंसी और ख़ुशी का जीता जागता रूप है। यह गांवों और शहरों में उत्साह से मनाया जाता है। ग्रामों में कई दिन पहले ही मनाया जाने लगता है। ब्रज में इस पर्व को बड़े हर्षोल्लास से लोग मनाते हैं। हमें प्रति वर्ष बड़े उत्साह से इस त्योहार को मनाना चाहिए और वैर-विरोध को छोड़ देना चाहिए।

Updated: March 2, 2020 — 8:55 am

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